Tuesday, April 14, 2009

त्रिवेणी

त्रिवेणी से प्रेरित:
1. रात को देखा खिड़की से, चाँद आधा है फलक पर,
तो तुम्हे रोटी जैसे चाँद बांटना भी सीख लिया अब.

या फ़िर तुमने धीरे से करवट बदली है रात में.

२. कौन कम्बक्त कहता है १२ महीने पुरा चाँद नही निकलता.
मेरे घर में दिन रात पायल पहन के ठुमकता है आजकल.

कोई ज्योतिष को जाके बता दो, कहता था वो मुझ पर अमावास भरी है.

३. वसंत आज सुबह अंगडाई ले रहा था की, सावन ने आके पानी फेर दिया
वसंत रूठ गया है इस साल वापस नही लौटेगा.

ऊपर से फ़िर किसी ने चिकोटी काटी होगी.

४. आंखों की कोर में तह कर रखी हैं यादें तुम्हारी,
रोने से डरते हैं आजकल कहीं सिलवटैँ न खुल जाए...

दिल की तिजोरी कहीं खो गई है बहुत दिनों से.

५. आंसों की बाढ़ में बह जाते हैं घर,
तुम आंखों की मेढ़ बना कर नई नींव रख दो.

घरोंदे सिर्फ़ इंट पत्थर के नही बनते.