Saturday, April 12, 2008

छोटी सी गुज़ारिश

बस इतनी सी गुज़ारिश है तुमसे,
दिल की उम्मीद को मेरी, साँसों से अपनी यूं ही बांधें रखना,
भूल के जो तुमने, नब्ज़ कभी अपनी जो थाम ली,
आरजू का मेरी, जनाज़ा तुम्हारे दिल की गलियों से ही गुजरेगा....

नीला ख्वाब

नीली स्याही से तुमने कागज़ पे जो ख्वाब लिखा था कभी,
पानी की कुछ बूंदों ने वो सब और फैला दिया,
लब्ज़ टटोल रही थी गीले नीले उस कागज़ पर जिस वक्त,
तुमने आकर आंखों में मेरी, वही नीला ख्वाब ज़बानी पढ़ कर सुना दिया।