कुछ अनकहे अलफ़ाज़...
Saturday, April 12, 2008
छोटी सी गुज़ारिश
बस इतनी सी गुज़ारिश है तुमसे,
दिल की उम्मीद को मेरी, साँसों से अपनी यूं ही बांधें रखना,
भूल के जो तुमने, नब्ज़ कभी अपनी जो थाम ली,
आरजू का मेरी, जनाज़ा तुम्हारे दिल की गलियों से ही गुजरेगा....
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