कुछ अनकहे अलफ़ाज़...
Wednesday, June 10, 2009
मुसाफिर
नया आघाज़ या पहला पूर्णविराम,
नया उजाला या रात का अंजाम,
ताजे
पल्लव या पतझङ का आराम,
नए रास्ते या मंजिलें गुमनाम!
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