यह जो मेरे पलकों की छांव है
उसके पीछे मेरे सपनो का छोटा सा एक गॉव है
एक नदी है जो कभी झरती है दिल की हलचल से
एक कंदील है जो चमकती है तुम्हारी आहट से
एक नन्हा सा घोंसला है दिल के पंछी का
एक आसमान है ऊँची उड़ान का ..
होसले की एक इमारत भी है
जो डगमगाती है पर बुलंद है
एक उम्मीद की सीढ़ी है जिसमे विश्वास की पैडी है
एक कच्चा पक्का पैड है यादों का
जिसमें नए पुराने रंगों के फूल हैं
कुछ मुरझाये फूलों पे ओस की नमी है
कुछ बंजर शाखों पे पल्लव की कमी है
मजबूत तना पर शाखें कमज़ोर हैं
कुछ नयी हरी कोपलें, कुछ अनछुई सपनो की कलियाँ हैं
पैड से गुजरती कई पुरानी यादों की गलियां हैं
यह जो मेरे पलकों की छांव है
उसके पीछे मेरे सपनो का छोटा सा एक गॉव है...
1 comment:
Dear Pallvi Ji
Too Good and Very Nice...
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