Sunday, January 31, 2010

आँखें

यह जो मेरे पलकों की छांव है
उसके पीछे मेरे सपनो का छोटा सा एक गॉव है


एक नदी है जो कभी झरती है दिल की हलचल से
एक कंदील है जो चमकती है तुम्हारी आहट से
एक नन्हा सा घोंसला है दिल के पंछी का
एक आसमान है ऊँची उड़ान का ..

होसले की एक इमारत भी है
जो डगमगाती है पर बुलंद है
एक उम्मीद की सीढ़ी है जिसमे विश्वास की पैडी है


एक कच्चा पक्का पैड है  यादों का
जिसमें नए पुराने रंगों के फूल हैं
 कुछ मुरझाये फूलों पे ओस की नमी है
कुछ बंजर शाखों पे पल्लव की कमी है
मजबूत तना पर शाखें कमज़ोर हैं
कुछ नयी हरी कोपलें, कुछ अनछुई सपनो की कलियाँ हैं
पैड से  गुजरती कई पुरानी यादों की गलियां हैं


यह जो मेरे पलकों की छांव है
उसके पीछे मेरे सपनो का छोटा सा एक गॉव है...

1 comment:

Anonymous said...

Dear Pallvi Ji

Too Good and Very Nice...