छुप के खो जाए वो क्यों ना भला बादलों के आँचल में
रूठ के सो जाए वो भले ही रात के काजल में
भटक जाए शायद कभी किसी अजनबी के पीछे
अटक जाए शायद उसका भी दिल किसी तारे के नोक के पीछे
ऐ चाँद मेरे इतना जान ले तू , रोज़ रोज़ के इस लुका छुपी के खेल में
निकलेगा एक दिन तो तू भी अपनी चाँदनी की तलाश में
ढूंड लेना हमे यहीं खड़े हैं हम..अपने एक ही चाँद की आस में.
1 comment:
too good !!
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