कुछ अनकहे अलफ़ाज़...
Wednesday, December 30, 2009
सपनो का कारवां
बादलों से चाँद का है मीलों का फासला ,
मुसाफिर को मिले जाने कब सीढ़ियों का रास्ता .
आज फिर रात की राह में चल पड़ेगा सपनो का कारवां
धुंडने फिर वही सिफर का वास्ता.
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